Relearning Love

  • Linear Location

    At linear Suryagarh, Jaisalmer, Rajasthan, India (26°55'0"N 70°46'47"E)


Carved in golden sandstone in the shadow Jaiselmer Fort is the story of the Alektay, the time of relearning love.  Far from romantic, it is an aspect of one of the worlds most brutal harvests.


It is on the grounds of the Hotel Suryagarh.  Though parts of the hotel are private, this installation is by the artificial lake which is public accessible during open hours.

Public Dedication

Was dedicated as part of the Stories from the Thar, InkSalon event.

Unique Views

Drone shot by Manoj Rai

What it says in 3 languages . . .

The story in English and . . .

The part of the story installed here:

Relearning Love

A generation of generations ago, every night the Moonwatchers would whisper the name of the first Jovian moon to be seen that evening. Elemental winds carried that Moon’s name through the communities and so began each Alektay— The Time of Relearning Love—an invitation to return fully to the reasons and ways you love those dear to you.

This now romanticized ritual was actually born of harsh necessity, for a spice produced in this land was one of the most lucrative but dangerous harvests of Kcymaerxthaereal times. Known simply as dfnjkb—a word from an otherwise unknown language, pronounced like the low tone of wind across an open bottle and often translated as “hollowness,” this rare and bitter spice could only be drawn from the minds of storytelling creatures like humans or wry/ansk shapes. Its raw material is found in that interior abyss when you are angry with someone you love and, in your mind, you have conversations with them over and over, never aloud, just eroding your self with the echoing venom of accelerating retelling. Ironically, the end product was not deadly, though the crippling harvest often was. It was like being the miner and the goldmine both, scraping away, your most defining textures and personal universes particulated—and slowly sluicing out for collection. Once captured, that broth of intimate dimensions, distilled repeatedly, made the legendarily bitter dfnjkb, said to require 335,287 unforgiven misunderstandings to make a single drop. Yet, in proper balance and subtlest application, dfnjkb has accented some of the xthaere’s most transcendent banquets—at least once bringing an entire rezhn peace for a generation.

Four Pezhephen Years (every day, all day—with escalating fury your only task) was the most anyone dared the corrosive internal harvest, but the rewards were huge: a year’s wages in a single week—indeed, such risks made this town one of the wealthiest anywhaere. Even the great Kirguellin was said to have tried his mind at it. So every night after harvest, the dfnjkbti unwound the toxins of seeing the worst in their loved ones, salving themselves by reconnecting to their joys and wonders instead. As for the veterans, survivors finished with anger, no longer needing the names of whispered moons to smile over family, they lived an endless Alektay, relearning the tenderness of love at the tenderest of paces.

Moonwatchers (MOON-wah-churz) – Astronomers of pSaqhaelin descent who keep time by the moons of Jupiter.
Jovian (JOH-vee-enn) – Of or belonging to the planet Jupiter.
Alektay (ah-lek-TAY) – The time of relearning love.
Kcymaerxthaere (ky-MAAR-ex-theer) – A parallel universe somewhat consistent with the world we know, but with different creatures, stories and even laws of physics.
Kcymaerxthaereal Times – Eras taking place in this parallel universe.
Dfnjkb (the low tone of wind across an open bottle) – Often translated as “hollowness”; also a rare and bitter spice harvested from the minds of storytelling creatures. Dfnjkbti – those creatures.
Wry/ansk (wry-ZHANSK) – A very unusual, and highly intelligent, creature. What you have in your mind as you draw a square, just before your pen touches paper, may seem to be a thought—but in Kcymaerxthaereal times, those forms in your mind were actually rather clever organisms called wry/ansk shapes.
Xthaere (ecks-THEER) – A shape with almost an infinity of dimensions or sides—infinity minus twenty-nine to be precise.
Rezhn (REE-zhn) – In Kcymaerxthaereal times, a body of land, waters, and dimensions akin to a continent.
Pezhephen Year (puh-ZHEFF-inn YEER) – Approximately 744 of our Earth days, with evocative seasons.
Kirguellin (keer-GELL-in ) – The legendary leader of the Armies of Complexity against Kmpass.

Rajhastani and . . .

प्रेम को पुनः सीखना –

कई पीढ़ियों से पूर्व की पीढ़ी में, प्रत्येक रात्रि में चंद्रमा को एकटक निहारने वाले लोग, फुसफुसाहट के मंद स्वर में, प्रथम बृहस्पति के चंद्रमा का नाम उच्चारित करते थे, जिसे मूल हवाएं जनसमूहों में से ले जाती। यहीं से ‘‘फिर से प्रेम सीखने की अवधि’’ अह्लेक्ते का आरंभ हो जाता। अपने प्रियजनों की ओर पूर्णरूपेण पुनः प्रेम करने की नीति पर लौट जाने का निमंत्रण होता।

अबतक अद्भुत रूप धारण कर चुकी इस पौराणिक विधि का उदय काएमायरिक्सथीरयल काल में कठोर आवष्यकताओं के कारण हुआ। यहां उत्पादित मसाले द्फ्न्ज्क्ब् की फसल बड़ा लाभ अर्जित कराने वाली भयानक किस्म की थी। द्फ्न्ज्क्ब् किसी अज्ञात भाषा का एक शब्द था जिसका अर्थ प्रायः ‘‘रिक्तता’’ से लगाया जाता और इसका उच्चारण किसी खुली बोतल के आरश्पार जाती हवा के मंद स्वर जैसा था। यह दुर्लभ असामान्य तथा कड़वा मसाला केवल मानव जैसे गढ़नेवाले मस्तिष्क से ही प्राप्त हो सकता था। इसकी सामग्री उस अन्तर्मन में पाई जाती जब कोई अपने प्रियजन से क्रोधित हो और अपने मन में उससे बारश्बार वार्तालाप करे लेकिन कभी भी उच्च वार्तालाप न करे, और जिसकी प्रतिध्वनि का जहर आपको भीतर से कुरेदता रहता और वार्तालाप के वेग को बढ़ाता। व्यंगात्मक ढंग से अंतिम उत्पाद विनाषकारी नहीं था लेकिन गंभीर फसल अक्सर विनाषक थी। ऐसा लगता मानो आप सोने की खान एवं खान खोदने वाले दोनों हों और आपके व्यक्तित्व को परिभाषित करने वाली रचना आपके ही अन्तर्मन को कुरेद रही हो और धीरे-धीरे घुलते हुए एकत्र हो रही हो। एक बार मिल जाने पर, इन परिचित पहलुओं का अर्क खींचने की क्रिया से, इस प्रसिद्ध कड़वे द्फ्न्ज्क्ब की एक बूंद प्राप्त होती। इस एक बूंद के लिए, ऐसा कहा जाता है कि 3,35,287 अक्षम्य गलतफहमियों की आवष्यकता होती थी। फिर भी उपयुक्त मात्रा और सूक्ष्म प्रयोग से, द्फ्न्ज्क्ब् ने इक्सथीर के कई उत्कृष्ट दावतखानों की शान बढ़ाई और कम से कम एक बार, एक पूरी पीढ़ी के रीज़न में शांति भी ले आया।

अधिक से अधिक चार पज़ेफिन साल तक (प्रतिदिन बढ़ता क्रोध) किसी ने इस घातक, आंतरिक फसल को बनाने की हिम्मत की थी क्योंकि पुरस्कार विषाल थे-एक ही सप्ताह में एक साल की मज़दूरी मिलने जैसे। वास्तव में इस तरह के जोखिम ने ही इस शहर को सबसे धनी बना दिया। कहा जाता था कि महान सेनापति कीरगेल्लिन ने भी इसका मन से प्रयास किया था। हर रात फसल कटाई के बाद, द्फ्न्ज्क्ब्ती अपने प्रियजन के भीतर की सब बुराईयांे को देखने वाले विषाक्त पदार्थो को त्याग देते जिससे वे अपनी खुषियों से पुनः मिलकर शांति प्राप्त करते थे। ऐसे अनुभवी लोग, जो क्रोध से तबाह हो गये हों, उन्हें अपने परिवार की प्रसन्नता प्राप्ति के लिए चंद्रमाओं के नाम धीमे स्वर में पुकारने की आवष्यकता नहीं होती, वे तो प्रेम के अनंत अह्लेक्ते में बने रहते और प्रेम की नाज़ुकता को, नाज़ुक लम्हों में महसूस करते थे।

अह्लेक्ते – पुनः प्रेम सीखने का समय।
काएमायरिक्सथीर – एक समानांतर ब्रह्माण्ड। ऐसा माना जाता है कि ये हमारे अपने साथ सह-अस्तित्व में है मगर यहाँ के लोगों की कहानियांँ और भौतिक विज्ञान के नियम हमसे अलग हैं। काएमायरिक्सथीरयल काल – इस समानांतर ब्रह्माण्ड में व्यतीत होने वाला समय।
द्फ्न्ज्क्ब् (उच्चारण में किसी खुली बोतल के पार जाती हवा के मध्य स्वर जैसा) – इसका अर्थ प्रायः ‘‘खालीपन’’ से लगाया जाता, एक दुर्लभ और कड़वा मसाला जो कहानी कहने वाले प्राणियों के मस्तिश्क से ही प्राप्त हो सकता था। द्फ्न्ज्क्ब्ती – द्फ्न्ज्क्ब उगाने वाले प्राणी।
इक्सथीर – ऐसा आकार जिसके अनगिनत पहलू हों, ठीक 29 घटाई अनन्तताएं।
रीज़न – काएमायरिक्सथीर के रीज़न हमारे महाद्वीपों और महासागरों के जैसे हैं।
पज़ेफिन साल – अंदाजे से धरती के 744 दिन, सुहाने मौसमों के साथ।
कीरगेल्लिन – एक महान सेनापति जिसने जटिलता की सेनाओं का नेतृत्व किया था।


पाछो प्रेम सीखणो-

लारली कई पीढ़ियों सूं पैले री पीढ़ी में चाँद रा जाणकार बृहस्पत ग्रह रे चाँद रो नाम दब्योड़ी जबान सूं लेवता हा। तात्विक हवावां उण चाँद रे नाम ने धुड़ों रे परे ले जावती अर फेरूं सरू हुयो अह्लेक्ते-पाछो प्रेम सीखण रो बगत, अपणा हेताळुआं ने पाछो प्रेम करण रो आखै विचारां रो न्यूतो।

हणा तक निरालो रूप धारण कर चुकी इण पौराणिक विधि रो जलम काएमायरिक्सथीरयल काळ री कठोर जरूरतों रे कारण हुओ हतो। ऐथ निपजणआळो मसालो द्फ्न्ज्क्ब घणो फायदो पुगावणआळो, पर खतरां सूं भर्योड़ी फसल हती-द्फ्न्ज्क्ब किणी बिना ठांव वाळी भासा रो सबद हो अर इणने घणकारी ठोड़ माथे खालीपण रे रूप मांय बोल्यो जावतो हो। इणरो उकेळ किणी खुली बोतल रे बिच्यां सूं बारे निकळती हवा रे जेड़ो हो। आ दोरो अर कड़वो मसालो सिर्फ मिनख जेड़ा घड़णआळा भेजों सूंइज मिळ सकतो हो। इणरो सेमान उण मांयला मन मांय मिळतो जद कोई आपरे खासमखास सूं रिसाजे अर घड़ी-घड़ी मन मांय उण सूं बातां करे पण कदेई ऊँची जबान मांय नी बोले, बस उणरी आवाज मिनख रे मांयला मन ने बारी-बारी कुरेदे अर बातचीत रे वेग ने बढ़ावे। देखणआळी बात आ ही कि आ उपज नाष करणआळी कोनी ही पण इण री खेती कई बार नाष रो कारण बणती। एड़ो लागतो ज्यों सोने री खाण अर खाण खोदणआळा दोन्यू हेक मेख होग्या हों अर आपरे व्यक्तित्व ने परिभाषित करणआळी रचना आपरे ही मांयला मन ने कुरेद री हती अर धीरे-धीरे धुळतोड़ी भेळी हो रही हती। एक बार मिळ्यां पछे इण जाणे पिछाणे पहलुवां रो अरक खींचण री क्रिया सूं कड़वे द्फ्न्ज्क्ब री एक बूंद मिळती। एड़ो कयो जावतो के एक बूंद बणावण खातिर बिना माफ करण जेड़ी 3,35,287 गलतफहमियों री जरूरत होवती हती। फेर भी द्फ्न्ज्क्ब ने इक्सथीर रे कई सबूं बढ़िया दावतखानों री शोभा बढ़ाई अर कम सूं कम एक पीढ़ी रे वास्ते रीज़न मांय शान्ति ल्याई।

घणे सूं घणी च्यार पजे़फिन साल तांई (रोजिना बढ़ती रीस) किणी इण खतराआळी, मांयली फसल उगावण री हिम्मत करी हती क्यूंकि इनाम मोटा हता-एकइज सप्ताह मांय सालभर री मजूरी जेड़ा। हकीकत मांय इण तरे रा जोखम ही इण शहर ने धनवान बणा दियो। एड़ो कयो जावतो कि नामी सेनापति कीरगेल्लिन भी इणरी मनूं कोषिष करी हती। हरेक रात फसल बाढण रे पछे द्फ्न्ज्क्ब्ती आपरे हेताळुआं रे मन री बुराइयां देखणआळी जहरीली चीजां ने छोड़ देवता अर आपरी खुषियां ने फेर सूं जाण कर शान्ति हासिल करता हता। एड़ा मांज्योड़ा लोग जो रीस रे कारण खतम होग्या हों, उणाने आपरे परिवार री खुषी रे खातर चाँद रो नाम धीमा सुर में लेवणा री जरूरत नी हती, वां तो प्रेम रा अनंत अह्लेक्ते में बण्या रेवता अर प्रेम री नाजुकता ने कंवळा तरीका सूं महसूस करता हता।

अह्लेक्ते – पाछो प्रेम सीखण री बेळा।
काएमायरिक्सथीर – एक बराबर चालण वाळो ब्रह्माण्ड। एड़ो मान्यो जावै कि आ आपणी साथे अस्तित्व में है पण ऐथ रा मिनखों री कहाणियांँ अर भौतिक विज्ञाण रा नियम हणा सूं अळगा हता। काएमायरिक्सथीरयल काळ – इण ब्रह्माण्ड में बीतणआळो टेम।
द्फ्न्ज्क्ब् (इणरो उकेळ किणी खुली बोतल रे बिच्यां सूं बारे निकळती हवा रे जेड़ो हो) – इणरो अरथ खालीपण सूं लगाायो जावतो, आ दोरो अर कड़वो मसालो, कहाणी केबाळा जीवों रे भेजों सूंइज मिळ सकतो हो। द्फ्न्ज्क्ब्ती – द्फ्न्ज्क्ब उगावणआळा जीव।
इक्सथीर – ऐड़ो आकार जिणरा अणगिणत पहलू होवे, ठीक 29 घट्योड़ी अनन्ततावां।
रीज़न – काएमायरिक्सथीर रा रीज़न आपणा महाद्वीपों और महासागरों रे जेड़ा है।
पज़ेफिन साल – अंदाजा सूं धरती रा 744 दिन, सुहावणा मौसमों रे साथे।
कीरगेल्लिन – हेक महाण सेणापति जिणने जटिलता री सेनावां रो नेतृत्व कर्यो हतो।


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